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अनुशासन पर्व
अध्याय २०
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भीष्म उवाच
ततो रात्र्यां व्यतीताय़ां प्रातरुत्थाय़ स द्विजः |  ५   क
स्नात्वा प्रादुश्चकाराग्निं हुत्वा चैव विधानतः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति