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वन पर्व
अध्याय २८९
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः संवत्सरे पूर्णे यदासौ जपतां वरः |  १२   क
नापश्यद्दुष्कृतं किञ्चित्पृथाय़ाः सौहृदे रतः ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति