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वन पर्व
अध्याय २८९
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वैशम्पाय़न उवाच
अन्नादिसमुदाचारः शय़्यासनकृतस्तथा |  ४   क
दिवसे दिवसे तस्य वर्धते न तु हीय़ते ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति