वन पर्व  अध्याय १३

अर्जुन उवाच

वाय़ुर्वैश्रवणो रुद्रः कालः खं पृथिवी दिशः |  २०   क
अजश्चराचरगुरुः स्रष्टा त्वं पुरुषोत्तम ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति