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शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
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भीष्म उवाच
अस्मन्मूर्तिश्चतुर्थी या सासृजच्छेषमव्ययम् |  ६८   क
स हि सङ्कर्षणः प्रोक्तः प्रद्युम्नं सोऽप्यजीजनत् ||  ६८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति