आदि पर्व  अध्याय २९

सूत उवाच

अपीत्वैवामृतं पक्षी परिगृह्याशु वीर्यवान् |  ११   क
अगच्छदपरिश्रान्त आवार्यार्कप्रभां खगः ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति