आदि पर्व  अध्याय २९

सूत उवाच

स चक्रं क्षुरपर्यन्तमपश्यदमृतान्तिके |  २   क
परिभ्रमन्तमनिशं तीक्ष्णधारमय़स्मय़म् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति