शान्ति पर्व  अध्याय २९

वैशम्पाय़न उवाच

अकृष्टपच्या पृथिवी पुटके पुटके मधु |  १३२   क
सर्वा द्रोणदुघा गावो वैन्यस्यासन्प्रशासतः ||  १३२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति