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शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
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भीष्म उवाच
ऐन्द्रीं तु दिशमास्थाय़ शैलराजस्य धीमतः |  २३   क
विविक्ते पर्वततटे पाराशर्यो महातपाः |  २३   ख
वेदानध्यापय़ामास व्यासः शिष्यान्महातपाः ||  २३   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति