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शान्ति पर्व
अध्याय २९
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वैशम्पाय़न उवाच
यस्य यज्ञेषु राजेन्द्र शतसङ्ख्येषु वै पुनः |  ३२   क
देवान्मनुष्यान्गन्धर्वानत्यरिच्यन्त दक्षिणाः ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति