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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २९
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वैशम्पाय़न उवाच
ये राजकार्येषु पुरा व्यासक्ता नित्यशोऽभवन् |  २   क
ते राजकार्याणि तदा नाकार्षुः सर्वतः पुरे ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति