आश्रमवासिक पर्व  अध्याय २९

वैशम्पाय़न उवाच

एवमाज्ञाप्य राजा स भ्रातृभिः सह पाण्डवः |  २५   क
श्वोभूते निर्ययौ राजा सस्त्रीवालपुरस्कृतः ||  २५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति