सभा पर्व  अध्याय २९

वैशम्पाय़न उवाच

तथा मध्यमिकाय़ांश्च वाटधानान्द्विजानथ |  ७   क
पुनश्च परिवृत्याथ पुष्करारण्यवासिनः ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति