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द्रोण पर्व
अध्याय १६७
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अर्जुन उवाच
धृतराष्ट्रेण भीष्माय़ द्रोणाय़ च विशां पते |  ४४   क
विसृष्टा पृथिवी सर्वा सह पुत्रैश्च तत्परैः ||  ४४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति