भीष्म पर्व  अध्याय ९१

सञ्जय़ उवाच

स गाढविद्धो व्यथितो नागो भरतसत्तम |  ४७   क
उपावृत्तमदः क्षिप्रं स न्यवर्तत वेगतः ||  ४७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति