वन पर्व  अध्याय २९

द्रौपद्यु उवाच

श्रेय़ो यदत्र धर्मज्ञ व्रूहि मे तदसंशय़म् |  ४   क
करिष्यामि हि तत्सर्वं यथावदनुशासनम् ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति