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विराट पर्व
अध्याय २९
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वैशम्पाय़न उवाच
असकृन्निकृतः पूर्वं मत्स्यैः साल्वेय़कैः सह |  २   क
सूतेन चैव मत्स्यस्य कीचकेन पुनः पुनः ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति