विराट पर्व  अध्याय २९

वैशम्पाय़न उवाच

क्रूरोऽमर्षी स दुष्टात्मा भुवि प्रख्यातविक्रमः |  ५   क
निहतस्तत्र गन्धर्वैः पापकर्मा नृशंसवान् ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति