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उद्योग पर्व
अध्याय २९
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वासुदेव उवाच
उताहो त्वं मन्यसे सर्वमेव; राज्ञां युद्धे वर्तते धर्मतन्त्रम् |  १९   क
अय़ुद्धे वा वर्तते धर्मतन्त्रं; तथैव ते वाचमिमां शृणोमि ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति