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उद्योग पर्व
अध्याय २९
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वासुदेव उवाच
वैश्योऽधीत्य कृषिगोरक्षपण्यै; र्वित्तं चिन्वन्पालय़न्नप्रमत्तः |  २३   क
प्रिय़ं कुर्वन्व्राह्मणक्षत्रिय़ाणां; धर्मशीलः पुण्यकृदावसेद्गृहान् ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति