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उद्योग पर्व
अध्याय २९
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वासुदेव उवाच
दुःशासनः प्रातिलोम्यान्निनाय़; सभामध्ये श्वशुराणां च कृष्णाम् |  ३३   क
सा तत्र नीता करुणान्यवोच; न्नान्यं क्षत्तुर्नाथमदृष्ट कञ्चित् ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति