उद्योग पर्व  अध्याय २९

वासुदेव उवाच

स्थिताः शमे महात्मानः पाण्डवा धर्मचारिणः |  ५१   क
योधाः समृद्धास्तद्विद्वन्नाचक्षीथा यथातथम् ||  ५१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति