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भीष्म पर्व
अध्याय २९
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श्रीभगवानु उवाच
तेषां ज्ञानी नित्ययुक्त एकभक्तिर्विशिष्यते |  १७   क
प्रिय़ो हि ज्ञानिनोऽत्यर्थमहं स च मम प्रिय़ः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति