menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय २८
chevron_left
chevron_right
अश्मो उवाच
सम्यग्घि धर्मं चरतो नृपस्य; द्रव्याणि चाप्याहरतो यथावत् |  ५६   क
प्रवृत्तचक्रस्य यशोऽभिवर्धते; सर्वेषु लोकेषु चराचरेषु ||  ५६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति