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द्रोण पर्व
अध्याय १११
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सञ्जय़ उवाच
राधेय़ं तु रणे दृष्ट्वा पदातिनमवस्थितम् |  १६   क
भीमसेनेन संरव्धं राजा दुर्योधनोऽव्रवीत् |  १६   ख
त्वरध्वं सर्वतो यत्ता राधेय़स्य रथं प्रति ||  १६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति