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द्रोण पर्व
अध्याय ३९
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सञ्जय़ उवाच
तस्योरस्तूर्णमासाद्य जत्रुदेशे विभिद्य तम् |  १०   क
अथैनं पञ्चविंशत्या पुनश्चैव समर्पय़त् ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति