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कर्ण पर्व
अध्याय २९
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सञ्जय़ उवाच
प्रमुञ्चन्तं वाणसङ्घानमोघा; न्मर्मच्छिदो वीरहणः सपत्रान् |  ९   क
कुन्तीपुत्रं प्रतिय़ोत्स्यामि युद्धे; ज्याकर्षिणामुत्तममद्य लोके ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति