शल्य पर्व  अध्याय २९

धृतराष्ट्र उवाच

कृतवर्मा कृपश्चैव द्रोणपुत्रश्च वीर्यवान् |  २   क
दुर्योधनश्च मन्दात्मा राजा किमकरोत्तदा ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति