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शल्य पर्व
अध्याय २९
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सञ्जय़ उवाच
तेऽपि सर्वे महेष्वासा अय़ुद्धार्थिनि कौरवे |  २५   क
निर्वन्धं परमं चक्रुस्तदा वै युद्धकाङ्क्षिणः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति