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शल्य पर्व
अध्याय २९
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सञ्जय़ उवाच
ततः प्राप्तो महाराज धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः |  ५३   क
द्वैपाय़नह्रदं ख्यातं यत्र दुर्योधनोऽभवत् ||  ५३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति