शान्ति पर्व  अध्याय ८३

मुनिरु उवाच

एकदोषा हि वहवो मृद्नीय़ुरपि कण्टकान् |  ५९   क
मन्त्रभेदभय़ाद्राजंस्तस्मादेतद्व्रवीमि ते ||  ५९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति