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शल्य पर्व
अध्याय २९
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सञ्जय़ उवाच
अत्यद्भुतेन विधिना दैवय़ोगेन भारत |  ५५   क
सलिलान्तर्गतः शेते दुर्दर्शः कस्यचित्प्रभो |  ५५   ख
मानुषस्य मनुष्येन्द्र गदाहस्तो जनाधिपः ||  ५५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति