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शान्ति पर्व
अध्याय २९०
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भीष्म उवाच
हित्वा च देहं प्रविशन्ति मोक्षं; दिवौकसो द्यामिव पार्थ साङ्ख्याः |  १०७   क
ततोऽधिकं तेऽभिरता महार्हे; साङ्ख्ये द्विजाः पार्थिव शिष्टजुष्टे ||  १०७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति