शान्ति पर्व  अध्याय २९०

भीष्म उवाच

अपां फेनोपमं लोकं विष्णोर्माय़ाशतैर्वृतम् |  ५७   क
चित्तभित्तिप्रतीकाशं नलसारमनर्थकम् ||  ५७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति