शान्ति पर्व  अध्याय २९०

भीष्म उवाच

नभो वहति लोकेश रजसः परमां गतिम् |  ७३   क
रजो वहति राजेन्द्र सत्त्वस्य परमां गतिम् ||  ७३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति