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वन पर्व
अध्याय २९०
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वैशम्पाय़न उवाच
पिता माता गुरवश्चैव येऽन्ये; देहस्यास्य प्रभवन्ति प्रदाने |  २२   क
नाहं धर्मं लोपय़िष्यामि लोके; स्त्रीणां वृत्तं पूज्यते देहरक्षा ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति