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शान्ति पर्व
अध्याय २९१
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वसिष्ठ उवाच
साङ्ख्ये च पठ्यते शास्त्रे नामभिर्वहुधात्मकः |  १८   क
विचित्ररूपो विश्वात्मा एकाक्षर इति स्मृतः ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति