शान्ति पर्व  अध्याय २९१

वसिष्ठ उवाच

एतद्देहं समाख्यातं त्रैलोक्ये सर्वदेहिषु |  २९   क
वेदितव्यं नरश्रेष्ठ सदेवनरदानवे ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति