शान्ति पर्व  अध्याय २९१

वसिष्ठ उवाच

सदंशकीटमशके सपूतिकृमिमूषके |  ३१   क
शुनि श्वपाके वैणेय़े सचण्डाले सपुल्कसे ||  ३१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति