शान्ति पर्व  अध्याय ९९

इन्द्र उवाच

इडोपहूतं क्रोशन्ति कुञ्जरा अङ्कुशेरिताः |  २५   क
व्याघुष्टतलनादेन वषट्कारेण पार्थिव |  २५   ख
उद्गाता तत्र सङ्ग्रामे त्रिसामा दुन्दुभिः स्मृतः ||  २५   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति