वन पर्व  अध्याय २९१

कुन्त्यु उवाच

अस्तु मे सङ्गमो देव यथोक्तं भगवंस्त्वय़ा |  २०   क
त्वद्वीर्यरूपसत्त्वौजा धर्मय़ुक्तो भवेत्स च ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति