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शान्ति पर्व
अध्याय २९२
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वसिष्ठ उवाच
विविधासु च शय़्यासु फलगृद्ध्यान्वितोऽफलः |  ११   क
मुञ्जमेखलनग्नत्वं क्षौमकृष्णाजिनानि च ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति