शान्ति पर्व  अध्याय २९२

वसिष्ठ उवाच

चातुराश्रम्यपन्थानमाश्रय़त्याश्रमानपि |  २०   क
उपासीनश्च पाषण्डान्गुहाः शैलांस्तथैव च ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति