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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १६
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व्राह्मण उवाच
भवत्कृतमिमं स्नेहं युधिष्ठिरविवर्धितम् |  २१   क
न पृष्ठतः करिष्यन्ति पौरजानपदा जनाः ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति