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वन पर्व
अध्याय २९२
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वैशम्पाय़न उवाच
मञ्जूषा त्वश्वनद्याः सा यय़ौ चर्मण्वतीं नदीम् |  २५   क
चर्मण्वत्याश्च यमुनां ततो गङ्गां जगाम ह ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति