शान्ति पर्व  अध्याय २९३

करालजनक उवाच

अथ वानन्तरकृतं किञ्चिदेव निदर्शनम् |  २०   क
तन्ममाचक्ष्व तत्त्वेन प्रत्यक्षो ह्यसि सर्वथा ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति