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शान्ति पर्व
अध्याय २९३
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वसिष्ठ उवाच
यदेव योगाः पश्यन्ति साङ्ख्यैस्तदनुगम्यते |  ३०   क
एकं साङ्ख्यं च योगं च यः पश्यति स वुद्धिमान् ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति