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शान्ति पर्व
अध्याय २९३
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वसिष्ठ उवाच
कलाः पञ्चदशा योनिस्तद्धाम इति पठ्यते |  ४   क
नित्यमेतद्विजानीहि सोमः षोडशमी कला ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति