वन पर्व  अध्याय २९३

वैशम्पाय़न उवाच

स तामुद्धृत्य मञ्जूषामुत्सार्य जलमन्तिकात् |  ५   क
यन्त्रैरुद्घाटय़ामास सोऽपश्यत्तत्र वालकम् ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति