शान्ति पर्व  अध्याय २९४

करालजनक उवाच

नानात्वैकत्वमित्युक्तं त्वय़ैतदृषिसत्तम |  १   क
पश्यामि चाभिसन्दिग्धमेतय़ोर्वै निदर्शनम् ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति